चाहे पुलिस हो, किसी की नज़र हो, या गलत समय पर बिगड़ी हुई आवाज़ हो, कॉमेडियन वीर दास याद करते हैं कि कैसे नादान बने रहने के कारण उन्हें खुशियां साझा करने का मौका मिला.